गुरुवार, 5 सितंबर 2013

कई दिनों बाद  फिर से 


पिछले  कई हफ़्तों से कोशिश चल रही थी के किसी तरह मेरे इस हिंदी ब्लॉग में चल रही फोंट्स की समस्या किसी तरह सुलझ जाये और पिछले शुरूआती पोस्ट्स में फोंट्स के साइज़ टाइप बैकग्राउंड रंग आदि में आई गड़बड़ी को दुरुस्त कर पाऊं । पर ये एक लम्बी प्रक्रिया है और समय काफ़ी लगता है । घंटों की मेहनत के बाद कुछ लाइन्स ही सही से लिख सका हूँ पर फ़िर भी ये कार्य संतोषजनक नहीं हुआ । समझ नहीं आता कि ब्लागस्पाट पर हिंदी में सीधे टाइप करके लिख सकने की सुविधा इंग्लिश की तरह क्यूँकर नहीं संभव है । पिछले कई पोस्ट्स अब भी फोंट्स प्रॉब्लम से ग्रसित रहने की वजह से हर किसी ब्राउज़र पर पढ़े नहीं जा सकेंगे इसका अफसोस है । 
 

रविवार, 28 जुलाई 2013

COME WITH ME TO DELHI-6( INDIA) :MY MUSICAL INITIATIONS

जुलाई २8, 2013 ( 5 .1 4 PM ) भारत 

बहुत दिनों के उपरांत ये ब्लॉग्गिंग (हिन्दी ) जारी रखने  का क्रम शुरू हो चला है \ पूर्व पोस्ट्स में अपने बचपन के दोरान संगीत में इधर उधर से मिले टिप्स का जिक्र कर रहा था ,जो की अभी पूर्ण नहीं हुए हैं \ब्लॉग्गिंग के दोरान आई अडचनों का भी मेने   जिक्र किया ही है कि टेक्निकल वजह से किस तरह रूकावटें आ रहीं थीं \पर अब लगता है कि स्टाइल में परिवर्तन को आत्मसात करने के उपरांत हिंदी कन्वर्शन टूल द्वारा सीधे टाइप करने  से भी काम बन रहा है\ सो संभवतः अब इसे जारी रखने में दिक्कत नहीं आनी चाहिए \

सन 1960 के आसपास से शुरू हुआ मेरा ये संगीत सफर उम्र के 56 बरस पूर्ण होने के बावजूद अभी  भी जारी है \तिस पर तुर्रा ये कि ना तो कोई साहिल दिखायी पड़ता है और न ही लगता है कि संगीत में कुछ सुरों के फासले तय कर पाया हूँ \ जहाँ से बचपन में सफर पर निकला था लगता है मानो की आज भी वहीँ खड़ा हुआ हूँ \यदि सच कहूं तो लगता है कि अब गायन के क्षेत्र में सुरों की पकड़ कमतर हो चली है\

और गायन  की कला में ये बहुत ही जरूरी है कि ना केवल रोंज ही रियाज यानि प्रक्टिस चले बल्कि उसका स्तर दिन ब दिन उच्च स्तर को प्राप्त होता रहे \ये कला अन्य  कलाओं  से ज्यादा व लगातार महनत की मांग करता है \इधर  पिछले दो सालों से मेरा रियाज़ गायन में कम हो गया है और गिटार बजाने में निरंतर  बदा है जिससे गाते वक्त सुरों पर कण्ट्रोल पहले से गिर चुका है \

वेसे बहुत जल्दी यु टियूब पर अपने चैनल पर मैं अपने स्वयं के गाये गाने अपलोड करने वाला हूँ जिसकी विडियो लिंक इस ब्लॉग पर भी बताऊंगा ताकि उसे सुनकर पाठक गण मेरी पिछले पैरा में लिखी बातों को स्वयं से तौल सकें\

तो तब तक के लिए आज्ञा देवें \
नमस्कार \

  

गुरुवार, 27 जून 2013

Temporary Absence From Blogging Scene

 प्रयास जून २7 , २013 ( ११  रात्री )

पिछले  कई  हफ्तों से में इन्टरनेट    माध्यम  से जुड़ नहीं पा रहा हूँ । इसका मुख्य कारण मेरे लैपटॉप का खराब पड़ जाना है । ऐसा लगता है कि ये खराबी नेट से मिले किसी अनजान वायरस की देन है । फिलहाल जो थोड़ा बहुत बामुश्किल कर पा रहा हूँ वो किसी और के लैपटॉप को मांग कर काम निकाल रहां हूँ । तिस पर एयरटेल का ये ३ जी कनेक्शन दुखी करे हुए है जो की १ जी से भी कम की स्पीड दे रहा है । समझ नहीं आता कि ये अपने साथ ही हो रहा है या कि और यूज़र्स भी इस से परेशान हैं । 

अपने पिछले पोस्ट में मैंने ब्लॉगर द्वारा हिन्दीकरण व फोन्ट समस्या का जिक्र इस उद्येश से किया था कि जहाँ एक तरफ पढने वाले समझ सकेंगे कि ये सब टेक्नोलॉजी की वजह से है , वहीँ दूसरी उम्मीद थी कि यदि भूले-भटके ब्लॉगर चलाने वाले इसे पढ़ें तो आवश्यक सुधार कर लेवें । 

इन सब वजहो से बहुत दिक्कतें पेश आ रहीं हैं जिससे  हिंदी ब्लॉग्गिंग में वो मज़ा व सुविधा नहीं मिल रही  है जो की मेरे दो इंग्लिश ब्लोग्स में फिलहाल मिल रहा है । 

खेर !

बुधवार, 22 मई 2013

The font problem on my page

  मेरी आपकी बातचीत में टाइपिंग फोंट्स की अड़चन                                   23 मई 2013


मैंने ये ब्लाग हिंदी भाषा में लिखना प्रारंभ किया तो है ,पर अब तक में दूसरी फाईल पर हिंदी में टाईप करने के बाद उसे यंहां पेस्ट कर रहा था ,परंतु ऐसा लग रहा है कि पढने वालों के ब्राऊसर पर मेरे दवारा लिखे शब्द हिंदी फोंट पर नहीं बल्कि अंग्रेज़ी के फोंट पर ही दिखते हैं और उसको कुछ समझ नहीं आता | ये बात मुझे तब से समझ आई जब मैंने अपना ब्लॉग किसी और के कंप्यूटर पर जाकर पढ़ा | इससे ज़ाहिर है की मेरी बात हिंदी भाषी पाठकों तक पहुँच ही नहीं रही थी । अब जाकर मुझे समझ आया की यह किस तरह करें की पाठकों को हिंदी में ही मेरा ब्लॉग पढ़ने को मिले । 

चूँकि मुझे इंग्लिश टाइपिंग के साथ साथ हिंदी में सीधा ही टाइप करने का अभ्यास है तो उतनी मुश्किल नहीं थी ,बस गति धीमी रहती थी । पर ब्लॉगर पर रोमन में टाइप करते हुए इसका हिंदीकरण करने वाली सुविधा ने ये झंझट भी दूर कर दिय । 

ये पोस्ट मैं मात्र हिंदी फोंटों का सही प्रदर्शन देखने के लिए कर रहा हूँ । आशा है की पाठक इस पोस्ट के उद्येश को समझते हुए अगले पोस्ट तक के लिये क्षमा करेंगे । 

शुभ -रात्रि  !!

मंगलवार, 14 मई 2013

My Music Initiation Five Decades Ago




सन 1960-70 के दशक की देहली - 6  से मेरी संगीत यात्रा  


मैंने अपने पिछले पोस्ट के शीर्षक को नाम दिया था मेरे संगीत गुरू जन पर जिन लोगों का  उसमें ज़िक्र किया है  उनसे मैंने सीधे -सीधे  संगीत ज्ञान तो नहीं लिया था पर उनसे मुझे संगीत क्या व कैसे होता है इसकी राह अवश्य ही मिली होगी ऐसा आज मेरा  मानना है । पर हाँ  अपने इस पिछले पोस्ट में ऐसे ही कुछ अन्य प्रेरकों का वर्णन मुझसे छूट गया था जिसका ध्यान आज आया तो सोचा कि इस पोस्ट के माध्यम से वो भी बतलाता चलूँ जिनकी उपस्थिति दिल्ली 6 के उन रिहायशी इलाकों में तब भी थी जब में वहां पैदा हुआ था आज भी है व आने वाले कई सदियों तक रहेगी ही, और जिनके साथ संगीत बहुत हद तक जुड़ा  हुआ है । 

ये प्रेरक वो धार्मिक जलूस  हैं जो की हर वर्ष पुरानी  दिल्ली की सडकों पर गुजरतें  हैं तथा जिन्हें देखने के लिए वहां पर रहने वाला हर बच्चा अपने घर से दौड़ा -दौड़ा सड़क तक चला आता है चाहे उसके घर वाले साथ हों या नहीं ।  ये थे  सिखों के गुरुओं के जन्मदिन आदि पर निकलने वाले जलूस तथा रामलीला की सवारियों  के निकलने के साथ मशहूर बैंड शेहनाई व ढोल -नगाडों का अलग अलग धुनों व तालों का बजाते हुए गुजरना । इसी तरह मोहर्रम आदि  पर रंग -बिरंगे चमकते ताजियों  के साथ ढोल-नगाड़ों का विभिन्न तालों का बजना जिनकी आवाज शारीर में एक रोमांच सा भर देती थी व इसी प्रकार के अन्य धार्मिक आयोजन जिनके साथ कुछ न कुछ संगीत जुड़ा रहता ही था । 

अब यदि कोई ऐसे संगीतमय माहौल में पैदा व पला-बड़ा हुआ हो तो भला क्या ये संभव  है की सुर व ताल उससे अछुतें रह जाएँ !! 



सोमवार, 13 मई 2013

My Music Initiation : Five Decades Ago !



मेरे  संगीत गुरु जन 


मेरी संगीत यात्रा उम्र के उस पड़ाव से ही प्रारंभ हो गई थी जब से मैंने होश संभालना शुरू किया था । ये ध्यान  देने योग्य बात है कि मेरे परिवार का मुझसे पूर्व संगीत कला से कोई रिश्ता नहीं था । मेरे पिताश्री से पहले के पूर्वजों का पुश्तैनी कार्य  शिल्पकारी का था जो कि मेरे प्रातःस्मरणीय दादाजी स्व 0 श्री मदन राम जी के साथ  तक रहा पर मेरे पिताश्री स्व 0 श्री कृष्ण लाल जी ने पढाई पर ही ध्यान दिया और पुरानी  देहली 6 में कुछ परिचितों की सेवादारी निभाने के साथ साथ 1940-50 के दशक में मैट्रिक प्रथम श्रेणी से पास की । उन्हें उस समय रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया से तुरंत नौकरी का आफर आ गया था परन्तु उन्होंने परिचितों के ग़लत सुझावों  के चलते उसे ज्वाइन नहीं किया । तदुपरांत उन्होंने अन्य कई जगह काम किया और अंततः सी .एस .आई .आर ( रफ़ी मार्ग , नई देहली ) में पक्की सरकारी पद से पेंशन पाकर   सेवानिवृत हुए । मेरी माँ स्व 0 श्रीमति गंगा देवी एक गृहस्थन बन मेरे पिताजी के साथ हाथ बटाने में लगीं रहीं सो उनका भी संगीत से दूर दूर तक कोई रिश्ता , स्नेह या लगाव नहीं था । सो  संगीत मुझे विरासतन नहीं अपितु महज अन्य बाहरी लोगों से देखा -सुनी  में शौक़ की तरह बचपन से ही चिपक सा गया था । 

हांलाकि  बचपन में मेरे संगीत के इस जबरदस्त झुकाव को ना तो घर वालों की तरफ से कोई रोक -टोक मिली और ना ही किसी तरह का कोई प्रोत्साहन । जितना मुझे संगीत अच्छा लगता था उतना ही म़ें  पढ़ाई में भी डूबा रहता था । यही कारण रहा कि मैं पहली कक्षा से लेकर ग्याहरवीं तक लगातार अपने विद्यालय का सर्वोच्च छात्र रहा और सी  बी एस सी देहली की  ग्याहरवीं  कक्षा के वार्षिक परिणामों में अपने इस विद्यालय ( आत्मा राम सनातन धर्म हायर सेकेंडरी स्कूल अजमेरी -गेट देह्ली - 6 ) में इस स्कूल के पिछले कई वर्षों के बोर्ड परीक्षाओं का भी रिकॉर्ड तोड़ते हुए मेरिट -बोर्ड में नाम दर्ज कराया था । ये बात अलग है   कि  उस समय ना ही  उस स्कूल के किसी अध्यापक ने और ना ही प्रधानाध्यापक ने मुझे अकेले में या अन्य के समक्ष इस उपलब्धि पर कोई प्रशस्ति पत्र  या मात्र बधाई ही दी या कुछ ऐसी ही   कुछ बात कही । आज जबकि लोग ऐसे परिणामों पर आसमान उठा देतें हैं मुझे याद नहीं कि  मेरे पिताश्री के अतिरिक्त किसी और ने मेरा उत्साहवर्धन किया था भी या  नहीं । पिताजी ने उस वक्त मुझे इनाम स्वरुप एक कलाई घड़ी दी थी जिससे मुझे लगा था कि मैंने कुछ तो प्रशंसात्मक कार्य किया ही था । स्कूल  के  ऑनर-बोर्ड  पर मेरा  नाम  था  और  मैंने  ये स्थान  प्राप्त  किया  था  ये  बात  भी  मुझे बहुत  दिन  बाद पता  चली  ।

बहरहाल  उस  समय के  कई  व्यक्ति  थे  शायद जिनसे प्रभावित होकर ही मैने भी नक़ल करते हुए अनजाने में संगीत का सिलसिला शुरू किया होगा और कालान्तर में ये मेरा मुख्य शौक़ बन गया । उस समय हमारा किराये का मकान हुआ करता था जो की पुरानी देहली की उन गलियों में था जहाँ से कुछ गली दूर ही किसी जमाने में उर्दू जुबां के मशहूर शायर उस्ताद मिर्जा ग़ालिब रहा करते थे । आज तो उस गली के ठीक सामने देहली रेलवे मेट्रो का चावड़ी बाज़ार स्टेशन है । उस समय हमारी गली में चार बाहरी शख्सियतें ऐसी थीं जो लगभग रोजाना अपने स्वयं के शौक़ या रोज़ी के चलते,संगीत से मेरा प्रतक्ष्य सामना करवाते थे । सन 1950 की उस समय की देहली का माहौल आज के देहली से बिल्कुल अलग था और यदि समय के तराजू पर समीक्षा करूँ तो वो आज से बहुत बेहतर भी था । उस दौर के वाकयात रहने वाले लोग उनके तौर -तरीक़े उन सब का हमसे पारस्परिक व्यव्हार हमारी आज गुज़र रही फ्लैट-संस्कृति से बिल्कुल अलग थी । उन सब का ज़िक्र यहाँ करने को दिल कह रहा है,पर वो सब फ़िर कभी किसी और पोस्ट में !

,slh iqjkuh mu ’kf[l;rska esa tsk ifgyk O;fDr ;kn vkrk gS oks Fkk eq>ls mez esa ,dk/k lky cM+k ,d yM+dk] ’kk;n mldk uke Fkk t;izdk’k] mudk ifjokj ml tekus esa ekSgYyska esa lQk+bZ vkfn dk dk;Z djrk Fkk A mldh vkokt+ o lqj laHkor% l/kk Fkk rHkh mldsk ml le; ekSgYys ds dqN laxhr dnznku fo’ks"k vkxzg djds ikl cqykdj xkus lqurs Fks vkSj xk;u lekfIr ij dqN buke nsdj izksRlkfgr djrs FksA mlds tkfrxr dk;Z ls yksxksa dk lk/kkj.kr;% mlls nwjh j[kuk ij laxhr ds oDr ml nwjh dsk utnhdh esa ys vkuk ];s izrhd gS fd laxhr esa ,d fo’ks"k vkd"kZ.k jgrk gh gS tsk balku dsk balku ds djhc ykrk gSA


nqljs ’k[+l Fks ,d v/ksM+ mez  eqfLye iM+kslh ] ftudsk lHkh ^dkesk ¥ ds uke ls cqykrs Fks]vkSj tsk izk;% vius ?kj ds njokts ij cSBdj ^iqNks uk dSls eSaus jSu fcrkbZ ¥ tks fd eUukMs lkfgc dsk xk;k cgqr izfln~/k fQ+Yeh xhr gS ]cgqr lqj ls xk;k djrs Fks A is’ks ls ;s tukc fjD’kk xkM+h pyk;k djrs FksA xkrs oDr ;s tukc vius esa eLr jgk djrs Fks vkSj eq>s ;kn ugha fd ;s dksbZ vkSj xkuk xkrs Hkh Fks ;k ugha A dksbZ vU; O;fDr uk gh budsk vkSj dqN xkus dsk dgrk Fkk vkSj uk gh yxrk Fkk fd muds xkus esa fdlh dsk dskbZ fnypLih Fkh Hkh !

rhljk ’k[+l Fkk] laxhrk/kfjr fHk{kko`rh ij viuh ftfodk fuoZgu djus okyk dskbZ vutku O;fDr  tks xyh esa cgqnk lkjaxh ctkrs vkrk Fkk vkSj ,d gh xkuk lkjaxh ij ctkrk Fkk rFkk lkFk esa ogh xkrk Hkh Fkk A tsk eq>s vPNh rjg ls lqj o dqN ’kCnks lfgr ;kn gS ^ deyh ds jksnu okys ¥ ,sls gh dqN ’kCn eq>s ml le; lqukbZ iM+rs Fks A ml xkus dh /kqu eq>s vkt Hkh vPNh rjg ;kn gS A

pkSFkk  ’k[+l ,d vkSj Hkh jgk ml le; dk ] ;s ;kn ugha vk jgk fd oks dskbZ ckyd Fkk ;k fd cM+k A ml le; mlh xyh ds nqljs fljs ij tks fd Fkkuk gkSTk dkth ds LVkWQ DokVZjhsa ls tkdj feyrk Fkk] ogka xyh fdukjs ij ,d ifjokj Fkk ftlesa ,d vkSjr Fkh ftls lc ^ySyk ¥ dgrs Fks vkSj tsk laHkor% fof{kIr lh Fkh] mlh ds ifjokj esa ls ;s dksbZ cPpk ;k ckyd Fkk tks cgqr Åaph o iryh lh vkokt+ esa dqN xkrs gq, fudyrk Fkk ] mldk xkuk o vkoktz rFkk mldh vkoktkoh dk irk mlds bl ’kkSd+ ls ekywe gskrk jgrk Fkk A

rks ;s lc 1950 o mlds vkl ikl ds n’kd ds nkSjku dh vkoktks+ dk oks eaTk+j ]’kk;n ftudh ot+g ls gh vutkus esa esjh rfc;r esa ,d uk;kc Q+u dk vkxk+t+ gqvk ftls dgrs gSa ekSfldh ;kfu laxhr A

vxys iksLV vkus rd !

शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013

Those Were The Days My Friend ....My Treasure



cpiu ds fnu Hkqyk uk nsuk---------          

vkt 27 vizsy 2013 gS vkSj 4 ctdj 25 feuV izkr% ;s iksLV fy[k jgk gqaA njvly ] vkt jkr fcLrj ij lksus ls iwoZ ds {k.kksa dk dkfQ+yk eq>s ;knksa ds lgjk esa igaqpk dj esjh uhan mM+k x;k ] vkSj eSa vius ’kq:vkrh thou ds mu ik;nkuksa rFkk ml le; ds NksM+s dneska ds fu’kkuksa dsk VVksyrk VVksyrk vius ml nkSj ds njks& fnokj ] xfy;ksa o yksxksa dsk ,d ,d djds tksM+us dh  dksf’k’k esa xqt+js cpiu dsk thoar djus dk vkuan ysus yxk A et+k cgqr vk jgk Fkk ] 50 lky igys dh mu dfM+;ksa dsk tksM+us esa rFkk mlls vius cpiu ds cgqr ls igywvksa rFkk thou esa vk;s x;s cgqr lh ’kf[l;rska dsk fQ+j ls vk[ks+ka ds le{k mu dh oks ckrksa ds lkFk ftu lc ls feydj cuk Fkk esjk cpiu A

gkaykfd] ;s dskbZ igyh erZck ugha gqvk gS fd oks nkSj [+;kyksa esa ;qa gh pyk vk;k] tc dHkh furkar vdsys {k.k feyrs gSa rks ;s flyflyk cu gh tkrk gS ] vkSj lcls fTk+;knk osk yksx ;kn vkrs gSa tsk ;wa rsk vc nqfu;k NksM+ pqds gSa ] ij esjh ;knska esa vkdj trk tkrsa gSa fd osk gSa vkSj jgsaxs tc rd fd eq>s esjk cpiu ;kn jgsxk A vkSj lp dgwa && HkbZ] dskbZ dqN Hkh dgs ;k lksps ;k le>s ]  eSa rsk Ckpiu ds fnu bruh vklkuh ls Hkqykus ls jgk ] vkf[k+j bl dk vkuan lc ls vyx vkSj lcls tqnk tks gS A